वाराणसी पिछले कुछ दिनों से ऑनलाइन एजुकेशन के माध्यम से शिक्षा अभियान में क्रांति करने वाले डॉ सत्या होप टॉक जिन्होंने फेसबुक को रियल बुक बनाने का पिछले 1 वर्ष से एक अभियान चला रखा है साहित्य सम्मान कार्यक्रम का चौथा चरण प्रारंभ किए हैं. विदित हो कि काशी हिंदू विश्वविद्यालय के चिकित्सा विज्ञान संस्थान स्थित नेशनल फैसिलिटी के वैज्ञानिक डॉ सत्य प्रकाश पांडेय चंदौली जिले के चकिया क्षेत्र के मूल निवासी हैं और शिक्षा के इस अभियान को अपने रिसर्च का हिस्सा बना चुके है. व्यक्तित्व विकास और स्ट्रेस मैनेजमेंट के प्रोजेक्ट को पिछले 1 वर्ष से जन जन की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने सोशल मीडिया माध्यम से वैश्विक परियोजना चला रखी है. इस परियोजना के अंतर्गत लोगों को अपनी बात रखने और अपने व्यक्तित्व में निरंतर सुधार करने की ट्रेनिंग दी जाती है. इसी कार्यक्रम के अंतर्गत पिछले 14 मार्च से वरिष्ठ एवं नवोदित साहित्य के धनी लेखक तथा नवाचार अपना रहे लोगों को एक मौका दिया जा रहा है. 101 लोगों को समाज के सामने जीवन को रचने वाली कविताओं को प्रस्तुत करने का एक सुनहरा अवसर दिया गया. इस अवसर का लाभ उठाते हुए अनेकों कवियों ने अपनी बात को समाज के सामने रखा और लोगों को जीवन जीने की सीख दी. विभिन्न राज्यों से जुड़ रहे भाषा भाषा तथा हिंदी की सेवा कर रहे लोगों में अनेकों लोगों की खबरें समाचार पत्रों में छप चुकी है. इसी तारतम्य में सुभाषिनी गुप्ता, अपर्णा दिक्षित, रश्मि सक्सैना, कृष्ण गोपाल राही, झरना माथुर,डॉ विमला व्यास, भास्कर आनंद, पुष्पा सैनी, डीके सक्सेना, संजय बवेजा, नीलू सक्सेना, सरिता कटिहार, भावना मिश्रा, श्रीमती सुदर्शन जी, जयशंकर प्रसाद द्विवेदी , संतोषी देवी, बबीता राणा , विष्णु शर्मा हरिहर, कमल किशोर मिश्रा कमल, शकुंतला देवी, अरविंद असर, अनीता शुक्ला, मीना शर्मा, मोहन द्विवेदी, मोहिनी गुप्ता, भावना भारद्वाज, राकेश तिवारी, डॉ प्रियंका त्रिपाठी दीपांजलि दुबे जी ने मनोरम काव्य पाठ करके कार्यक्रम को अपना समर्थन दिया. शिक्षा के इस अभियान को और पुष्ट करने के लिए, लगभग सभी कवियों ने बारंबार अपनी उपस्थिति देने के लिए भी अपनी सहमति दिखाई. 28 मार्च तक चलने वाले इस कार्यक्रम में समाज को नवचेतना से भरने तथा सोशल मीडिया में व्याप्त बुराइयों से सीधी टक्कर लेने के लिए यह बृहद प्रोजेक्ट काशी हिंदू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक द्वारा चलाया जा रहा है. उनका मानना है कि सोशल मीडिया का जब तक डिटॉक्सिफिकेशन नहीं किया जाएगा, यह अनियंत्रित ऊर्जा स्रोत, समाज को एक अंधेरे कोने में ढकेल कर रख देगा. साहित्य सम्मान कार्यक्रम के अगले चरण में चरित्र निर्माण पर भी बल दिया जाएगा. कार्यक्रम में मीट कार्यक्रम के सदस्यों ने आभार व्यक्त करके समाज को एक कड़ी में बने रहने का संदेश दिया. संजय सागर जी, डॉ ओम प्रकाश मिश्रा व्यथित जी, तथा वर्षा अवस्थी मिट्ठू जी ने अभी तक कार्यक्रम के प्रति तथा काव्य मंडल के सदस्यों के प्रति अपना बृहद आभार प्रस्तुत किया है।
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