रिपोर्ट-विनोद कुमार
चन्दौली नौगढ़ विकास खंड सभागार में ग्राम्या संस्थान व सहयोग संस्था लखनऊ के द्वारा अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षित गर्भसमापन दिवस के अवसर पर
मीडिया के साथ चर्चा रखी गई। कार्यक्रम में ग्राम्या संस्थान की नीतू ने बताया कि हर साल होने वाले 5.6 करोड़ गर्भसमापन में 2.5 करोड़ असुरक्षित होते है। इनमें 22000 लड़कियों और महिलाओं की मृत्यु होती है- जो की दुनियाभर में होनी वाली मातृत्व मृत्यु का 8 % है और अन्य 70 लाख महिलाओं को गंभीर या स्थायी नुकसान होता है | इनमें से बहुत मृत्यु और नुकसान ऐसे है जो रोके जा सकते है और उन देशों,राज्यों में होते है जहां के क़ानून गर्भसमापन पे अनेक तरह के प्रतिबन्ध लगाते है।शोध बताते है कि गर्भसमापन पे प्रतिबन्ध लगाने से गर्भसमापन कम नहीं होते है, बल्कि असुरक्षित गर्भसमापन को बढ़ावा देते है। खासकर के गरीब और वंचित समुदायों की लड़कियों और महिलाओं के लिए (ग्लोबल डिक्लेरेशन ऑन एबॉर्शन , नैरोबी सबमिट ऑन ICPD25)लॉकडाउन के कारण गर्भनिरोधन हासिल करने और उसके प्रयोग में काफ़ी हद तक कमी देखी गई। कोविड के चलते सरकार द्वारा हेल्थ सेंटरों पर नसबंदी और आईयूसीडी की सेवाएँ भी रोकी गई ! बिना डॉक्टर के पर्चे पर मेडिकल स्टोर से मिलने वाली गर्भ निरोधक दवाई, कंडोम, आदि को प्राप्त करने में लोगों को काफ़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लॉकडाउन के दौरान फाउंडेशन फॉर रेप्रोडिकटिव हेल्थ ऑफ़ इंडिया के अध्यन के अनुसार इन गर्भनिरोधन सेवाओं के न हासिल करने की वजह से भारत में करीब 2.38 लाख अतिरिक्त अनचाहे गर्भधारण, 1.45 लाख अतिरिक्त गर्भपात जिसमे 834,042 असुरक्षित गर्भपात और 1,743 अतिरिक्त मातृ मृत्यु होने की संभावना है। ज्यादा समय तक ऐसा रहा तो इसका प्रभाव और भी भयानक होगा। असुरक्षित गर्भ समापन को सुरक्षित बनाने के लिए ज़रूरी है कि, सेवाएं उपलब्ध कराने वाले लोगों को प्रशिक्षण दिया जाए, प्राथमिक उपचार केन्द्रों में उचित गर्भ समापन सेवाएं उपलब्ध कराई जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि महिलाएं अप्रशिक्षित सेवा प्रदाताओं के पास न जाकर प्रशिक्षित सेवा प्रदाताओं तक पहुंच सकें| इस बदलाव का एक ज़रूरी पहलू ये है कि गर्भ समापन सेवाओं की उपलब्धता की जानकारी सार्वजनिक स्तर पर उपलब्ध कराई जाए| खासकर किशोरियों और एकल महिलाओं के बीच जिनके लिए आमतौर पर प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध नहीं होती|इसलिए गोपनीयता की गारंटी भी दी जानी चाहिए, जिससे एकल महिलाएं बिना किसी डर या संकोच के इन सेवाओं का इस्तेमाल कर सकें|आज जरुरी है सरकार के द्वारा गर्भनिरोधक साधनों के बारे में जानकारी और सेवाएं, जिसमें आपातकालीन गर्भनिरोधक भी शामिल है को समुदाय के जरूरतमंद लोगों तक पहुचाया जाए साथ ही MTP कानून के तहत जानकारी और सेवाएं दी जाये तथा गर्भपात के बाद की देखभाल को सुनिश्तित किया जाये तथा समुदाय को इस बात की जानकारी दी जानी चाहिए कि वह सुरक्षित गर्भपात की सेवा किन किन स्वास्थ्य सुविधाओं से से प्राप्त कर सकते हैं जिसको लेकर IEC/ पेपर/ TV आदि के माध्यम से विज्ञापन भी दिए जाएँ !भारत में गर्भ समापन से जुड़ा कलंक और शर्मिंदगी सुरक्षित और कानूनी सेवाओं तक पहुंच में बाधा डालती है। गर्भसमापन के सेवाओं के बारे में मिथकों और गलतफहमी को दूर करना जरुरी हैं तभी सभी के लिए प्रजनन स्वास्थ्य को न्याय संगत बनाना जा सकता है भारत में चिकित्सकीय गर्भ समापन कानून (मेडिकल टर्मीनेसन आफ प्रेगनेंसी अधिनियम 1971) के अन्तर्गत महिलायें कुछ विशेष परिस्थितियों जैसे महिला की जान को कोई खतरा हो, उसे शारीरिक या मानसिक नुकसान पहुंचने की आशंका हो, उसका बलात्कार हुआ हो, या फ़िर उसके पास कोई सामाजिक और आर्थिक कारण हो आदि में गर्भधारण के 20 हफ़्तों तक गर्भपात सरकारी अस्पताल में या सरकार की ओर से अधिकृत किसी भी चिकित्सा केन्द्र में अधिकृत व प्रशिक्षित डॉक्टर द्वारा गर्भसमापन करा सकती है। उक्त कार्यक्रम में रिंकू, अनीता,अमरावती,अर्चना, रामविलास आदि लोग शामिल रहे।
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