गणेश चतुर्थी 2020:श्रीगणेश से सीखें बिजनेस मैनेजमेंट, उनका बड़ा सिर हमें बताता है कि बिजनेस में बड़ी सोच रखना जरूरी
आज पूरे देश में गणेश चतुर्थी पर्व मनाया जा रहा है। आज से 10 दिन तक गणपति बप्पा घर-घर में विराजेंगे। आज जब कोरोना काल के कारण व्यापारियों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है तो ऐसे में बुद्धि और ज्ञान के देवता भगवान गणेश से कई सीख ली जा सकती हैं। देखने में भले ही श्रीगणेश का स्वरूप विचित्र लगे, लेकिन गणेशजी के इन सभी अंगों में बिजनेस मैनेजमेंट से जुड़े खास सूत्र छिपे हैं, जरूरत है तो उन्हें समझने की। श्रीगणेश से जुड़े बिजनेस मैनेजमेंट के इन सूत्रों को आजमाकर आप अपने बिजनेस को सफल बना सकते हैं। आज हम आपको ये बिजनेस मैनेजमेंट के सूत्र बता रहे हैं।
गणेशजी का बड़ा सिर
गणेशजी का बड़ा सिर हमें बताता है कि बिजनेस में बड़ी सोच रखना जरूरी है। हमें इसी सोच के साथ ही आगे बढ़ना चाहिए। जब हमारे पास बड़ा टारगेट और एक पुख्ता प्लान होगा तो निश्चित रूप में हम अपने बिजनेस को नई ऊंचाइयों पर ले जाने में सफल होंगे।
गणेशजी की छोटी आंखें
छोटी आंखें हमें बताती हैं कि बिजनेस में हमें सदैव अपना लक्ष्य निर्धारित रख कर आगे बढ़ना चाहिए। छोटी आंख वाले सभी जीवों की नजर बहुत तेज होती है और उनका ध्यान पूरी तरह अपने लक्ष्य पर ही होता है।
गणेशजी के बड़े कान
बड़े कान हमें बताते हैं कि बिजनेस में हमेशा सजग रहना चाहिए। हमारा सूचना तंत्र इतना मजबूत होना चाहिए कि बिजनेस को प्रभावित करने वाली हरबात हमें तुरंत पता होनी चाहिए ताकि हम समय पर रणनीति बना सकें।
छोटी सवारी
गणेश भगवान की सवारी मूषक से अपनी इच्छाओं और खर्चों को लिमिट में रखने की सीख ली जा सकती है। ये हमें फिजूल खर्ची से दूर रहने की प्रेरणा देता है क्योंकि फिजूलखर्ची आपके बजट और फ्यूचर प्लानिंग को बिगाड़ सकती है।
गणेश जी की सूंड
जैसे हाथी की सूंड बड़ी होती है, उसी तरह हमारे बिजनेस संपर्क भी दूर-दूर तक होना चाहिए ताकि उनका लाभ भी हमें मिलता रहे। सूंड की पकड़ भी मजबूत होती है, उसीतरह कर्मचारियों पर भी हमारी पकड़ मजबूत रहे।
श्रीगणेश का बड़ा पेट
बिजनेस में लाभ-हानि होती रहती है। कभी-कभी हानि का अनुपात ज्यादा हो जाता है। ऐसी स्थिति में गणेशजी का बड़ा पेट हमें सीखाता है कि हमारे अंदर हानि पचाने की भी पूर्ण क्षमता होनी चाहिए।
हटके सोचना जरूरी
जब भगवान गणेश और कार्तिकेय में प्रतियोगिता हुई कि कौन संसार के 3 चक्कर पहले लगाएगा तब गणेश जी ने अपनी बुद्धि और विवेक से काम लेते हुए अपने माता-पिता यानी भगवान शिव और माता पार्वती की परिक्रमा कर प्रतियोगिता जीत ली। उनकी अलग सोच ने उन्हें प्रतियोगिता में विजय बनाया। आप भी इससे सीख लेकर जो सभी कर रहे हैं, उससे अलग करने का प्रयास करें क्योंकि कुछ नया पाने के लिए प्रयास भी अलग तरह से करने करना होगा।
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