गाजीपुर। सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग सेवाए दो दिन के लिए ठप हो गईं। बैंक कर्मी बुधवार से दो दिन की हड़ताल पर चले गए। हड़तालियों ने अपनी शाखाओं के समक्ष धऱना-प्रदर्शन भी किया। यह हड़ताल राष्ट्रव्यापी है। इसका आह्वान अखिल यूनाइटेड फोर ऑफ बैंक यूनियंस(यूएफबीयू) ने किया है। इस दशा में बैंक ग्राहकों की परेशानी शुरू हो गई है। हड़ताल के पहले ही दिन एटीएम भी खाली होने शुरू हो गए। अग्रणी बैंक यूबीआई के रीजनल ऑफिस के सामने यूएफबीयू के बैनर तले बैंक कर्मियों ने धरना-प्रदर्शन किया। बैंक कर्मी नेताओं ने सरकार पर सीधा हमला बोला। उनका कहना था कि सरकार कर्मचारी विरोधी है। कर्मचारियों को उनकी कठिन मेहनत के आधार पर वेतन मिलना चाहिये लेकिन सरकार बैंकों के मुनाफे के आधार पर वेतन की बात कह रही है। यह सरासर बेइंसाफी है। कर्मचारियों के वेतन में दो प्रतिशत की वृद्धि होनी चाहिए। बैंक कर्मी नेताओं ने दावा किया कि गाजीपुर में सार्वजनिक क्षेत्र की कुल 450 शाखाओं में ताले नहीं खुले। सभी दो हजार बैंक कर्मी हड़ताल में पूरी तरह शामिल हैं। पहले ही दिन करीब 50 करोड़ रुपये का लेन-देन बाधित हुआ। धरना-प्रदर्शन में जितेंद्र शर्मा, धर्मेंद्र देव प्रसाद, हरिद्वार, संतोष, अशोक सिंह यादव आदि प्रमुख थे
गाजीपुर। सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग सेवाए दो दिन के लिए ठप हो गईं। बैंक कर्मी बुधवार से दो दिन की हड़ताल पर चले गए। हड़तालियों ने अपनी शाखाओं के समक्ष धऱना-प्रदर्शन भी किया। यह हड़ताल राष्ट्रव्यापी है। इसका आह्वान अखिल यूनाइटेड फोर ऑफ बैंक यूनियंस(यूएफबीयू) ने किया है। इस दशा में बैंक ग्राहकों की परेशानी शुरू हो गई है। हड़ताल के पहले ही दिन एटीएम भी खाली होने शुरू हो गए। अग्रणी बैंक यूबीआई के रीजनल ऑफिस के सामने यूएफबीयू के बैनर तले बैंक कर्मियों ने धरना-प्रदर्शन किया। बैंक कर्मी नेताओं ने सरकार पर सीधा हमला बोला। उनका कहना था कि सरकार कर्मचारी विरोधी है। कर्मचारियों को उनकी कठिन मेहनत के आधार पर वेतन मिलना चाहिये लेकिन सरकार बैंकों के मुनाफे के आधार पर वेतन की बात कह रही है। यह सरासर बेइंसाफी है। कर्मचारियों के वेतन में दो प्रतिशत की वृद्धि होनी चाहिए। बैंक कर्मी नेताओं ने दावा किया कि गाजीपुर में सार्वजनिक क्षेत्र की कुल 450 शाखाओं में ताले नहीं खुले। सभी दो हजार बैंक कर्मी हड़ताल में पूरी तरह शामिल हैं। पहले ही दिन करीब 50 करोड़ रुपये का लेन-देन बाधित हुआ। धरना-प्रदर्शन में जितेंद्र शर्मा, धर्मेंद्र देव प्रसाद, हरिद्वार, संतोष, अशोक सिंह यादव आदि प्रमुख थे
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